Saturday, 28 December 2019

भगवान पर भरोसा - प्रेरणाप्रद कहानी

भगवान पर भरोसा :

एक पुरानी सी इमारत में था वैद्यजी का मकान था। पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के लिए आवश्यक सामान एक चिठ्ठी में लिख कर दे देती थी। वैद्यजी गद्दी पर बैठकर पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते कि हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। वैद्यजी कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, कोई नहीं देता था किन्तु एक बात निश्चित थी कि ज्यों ही उस दिन के आवश्यक सामान ख़रीदने योग्य पैसे पूरे हो जाते थे, उसके बाद वह किसी से भी दवा के पैसे नहीं लेते थे चाहे रोगी कितना ही धनवान क्यों न हो।

एक दिन वैद्यजी ने दवाख़ाना खोला। गद्दी पर बैठकर परमात्मा का स्मरण करके पैसे का हिसाब लगाने के लिए आवश्यक सामान वाली चिट्ठी खोली तो वह चिठ्ठी को एकटक देखते ही रह गए। एक बार तो उनका मन भटक गया। उन्हें अपनी आँखों के सामने तारे चमकते हुए नज़र आए किन्तु शीघ्र ही उन्होंने अपनी तंत्रिकाओं पर नियंत्रण पा लिया। आटे-दाल-चावल आदि के बाद पत्नी ने लिखा था, *"बेटी का विवाह 20 तारीख़ को है, उसके दहेज का सामान।"* कुछ देर सोचते रहे फिर बाकी चीजों की क़ीमत लिखने के बाद दहेज के सामने लिखा, '' *यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।*''

एक-दो रोगी आए थे। उन्हें वैद्यजी दवाई दे रहे थे। इसी दौरान एक बड़ी सी कार उनके दवाखाने के सामने आकर रुकी। वैद्यजी ने कोई खास तवज्जो नहीं दी क्योंकि कई कारों वाले उनके पास आते रहते थे। दोनों मरीज दवाई लेकर चले गए। वह सूटेड-बूटेड साहब कार से बाहर निकले और नमस्ते करके बेंच पर बैठ गए। वैद्यजी ने कहा कि अगर आपको अपने लिए दवा लेनी है तो इधर स्टूल पर आएँ ताकि आपकी नाड़ी देख लूँ और अगर किसी रोगी की दवाई लेकर जाना है तो बीमारी की स्थिति का वर्णन करें।

वह साहब कहने लगे "वैद्यजी! आपने मुझे पहचाना नहीं। मेरा नाम कृष्णलाल है लेकिन आप मुझे पहचान भी कैसे सकते हैं? क्योंकि मैं 15-16 साल बाद आपके दवाखाने पर आया हूँ। आप को पिछली मुलाकात का हाल सुनाता हूँ, फिर आपको सारी बात याद आ जाएगी। जब मैं पहली बार यहाँ आया था तो मैं खुद नहीं आया था अपितु ईश्वर मुझे आप के पास ले आया था क्योंकि ईश्वर ने मुझ पर कृपा की थी और वह मेरा घर आबाद करना चाहता था। हुआ इस तरह था कि मैं कार से अपने पैतृक घर जा रहा था। बिल्कुल आपके दवाखाने के सामने हमारी कार पंक्चर हो गई। ड्राईवर कार का पहिया उतार कर पंक्चर लगवाने चला गया। आपने देखा कि गर्मी में मैं कार के पास खड़ा था तो आप मेरे पास आए और दवाखाने की ओर इशारा किया और कहा कि इधर आकर कुर्सी पर बैठ जाएँ। अंधा क्या चाहे दो आँखें और कुर्सी पर आकर बैठ गया। ड्राइवर ने कुछ ज्यादा ही देर लगा दी थी।

एक छोटी-सी बच्ची भी यहाँ आपकी मेज़ के पास खड़ी थी और बार-बार कह रही थी, '' चलो न बाबा, मुझे भूख लगी है। आप उससे कह रहे थे कि बेटी थोड़ा धीरज धरो, चलते हैं। मैं यह सोच कर कि इतनी देर से आप के पास बैठा था और मेरे ही कारण आप खाना खाने भी नहीं जा रहे थे। मुझे कोई दवाई खरीद लेनी चाहिए ताकि आप मेरे बैठने का भार महसूस न करें। मैंने कहा वैद्यजी मैं पिछले 5-6 साल से इंग्लैंड में रहकर कारोबार कर रहा हूँ। इंग्लैंड जाने से पहले मेरी शादी हो गई थी लेकिन अब तक बच्चे के सुख से वंचित हूँ। यहाँ भी इलाज कराया और वहाँ इंग्लैंड में भी लेकिन किस्मत ने निराशा के सिवा और कुछ नहीं दिया।"

आपने कहा था, "मेरे भाई! भगवान से निराश न होओ। याद रखो कि उसके कोष में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है। आस-औलाद, धन-इज्जत, सुख-दुःख, जीवन-मृत्यु सब कुछ उसी के हाथ में है। यह किसी वैद्य या डॉक्टर के हाथ में नहीं होता और न ही किसी दवा में होता है। जो कुछ होना होता है वह सब भगवान के आदेश से होता है। औलाद देनी है तो उसी ने देनी है। मुझे याद है आप बातें करते जा रहे थे और साथ-साथ पुड़िया भी बनाते जा रहे थे। सभी दवा आपने दो भागों में विभाजित कर दो अलग-अलग लिफ़ाफ़ों में डाली थीं और फिर मुझसे पूछकर आप ने एक लिफ़ाफ़े पर मेरा और दूसरे पर मेरी पत्नी का नाम लिखकर दवा उपयोग करने का तरीका बताया था।

मैंने तब बेदिली से वह दवाई ले ली थी क्योंकि मैं सिर्फ कुछ पैसे आप को देना चाहता था। लेकिन जब दवा लेने के बाद मैंने पैसे पूछे तो आपने कहा था, बस ठीक है। मैंने जोर डाला, तो आपने कहा कि आज का खाता बंद हो गया है। मैंने कहा मुझे आपकी बात समझ नहीं आई। इसी दौरान वहां एक और आदमी आया उसने हमारी चर्चा सुनकर मुझे बताया कि खाता बंद होने का मतलब यह है कि आज के घरेलू खर्च के लिए जितनी राशि वैद्यजी ने भगवान से माँगी थी वह ईश्वर ने उन्हें दे दी है। अधिक पैसे वे नहीं ले सकते।

मैं कुछ हैरान हुआ और कुछ दिल में लज्जित भी कि मेरे विचार कितने निम्न थे और यह सरलचित्त वैद्य कितना महान है। मैंने जब घर जा कर पत्नी को औषधि दिखाई और सारी बात बताई तो उसके मुँह से निकला वो इंसान नहीं कोई देवता है और उसकी दी हुई दवा ही हमारे मन की मुराद पूरी करने का कारण बनेंगी। आज मेरे घर में दो फूल खिले हुए हैं। हम दोनों पति-पत्नी हर समय आपके लिए प्रार्थना करते रहते हैं। इतने साल तक कारोबार ने फ़ुरसत ही न दी कि स्वयं आकर आपसे धन्यवाद के दो शब्द ही कह जाता। इतने बरसों बाद आज भारत आया हूँ और कार केवल यहीं रोकी है।

वैद्यजी हमारा सारा परिवार इंग्लैंड में सेटल हो चुका है। केवल मेरी एक विधवा बहन अपनी बेटी के साथ भारत में रहती है। हमारी भान्जी की शादी इस महीने की 21 तारीख को होनी है। न जाने क्यों जब-जब मैं अपनी भान्जी के भात के लिए कोई सामान खरीदता था तो मेरी आँखों के सामने आपकी वह छोटी-सी बेटी भी आ जाती थी और हर सामान मैं दोहरा खरीद लेता था। मैं आपके विचारों को जानता था कि संभवतः आप वह सामान न लें किन्तु मुझे लगता था कि मेरी अपनी सगी भान्जी के साथ जो चेहरा मुझे बार-बार दिख रहा है वह भी मेरी भान्जी ही है। मुझे लगता था कि ईश्वर ने इस भान्जी के विवाह में भी मुझे भात भरने की ज़िम्मेदारी दी है।

वैद्यजी की आँखें आश्चर्य से खुली की खुली रह गईं और बहुत धीमी आवाज़ में बोले, '' कृष्णलाल जी, आप जो कुछ कह रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा कि ईश्वर की यह क्या माया है। आप मेरी श्रीमती के हाथ की लिखी हुई यह चिठ्ठी देखिये।" और वैद्यजी ने चिट्ठी खोलकर कृष्णलाल जी को पकड़ा दी। वहाँ उपस्थित सभी यह देखकर हैरान रह गए कि ''दहेज का सामान'' के सामने लिखा हुआ था '' यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।''

काँपती-सी आवाज़ में वैद्यजी बोले, "कृष्णलाल जी, विश्वास कीजिये कि आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि पत्नी ने चिठ्ठी पर आवश्यकता लिखी हो और भगवान ने उसी दिन उसकी व्यवस्था न कर दी हो। आपकी बातें सुनकर तो लगता है कि भगवान को पता होता है कि किस दिन मेरी श्रीमती क्या लिखने वाली हैं अन्यथा आपसे इतने दिन पहले ही सामान ख़रीदना आरम्भ न करवा दिया होता परमात्मा ने। वाह भगवान वाह! तू महान है तू दयावान है। मैं हैरान हूँ कि वह कैसे अपने रंग दिखाता है।"

वैद्यजी ने आगे कहा,सँभाला है, एक ही पाठ पढ़ा है कि सुबह परमात्मा का आभार करो, शाम को अच्छा दिन गुज़रने का आभार करो, खाते समय उसका आभार करो, सोते समय उसका आभार करो।

साभार -व्हाट्सप्प स्टोरी

Monday, 25 November 2019

Basic electrical questions in hindi

Most basic electrical  engineering  questions-
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के कुछ basic तथ्य-
प्रश्न 1.आउटडोर इलेक्ट्रिक सबस्टेशन स्विच यार्ड में कंकड़ी बिछाने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर -
जैसा कि हम जानते हैं आउटडोर सबस्टेशन स्विचयार्ड पर कंकड़ी बिछी रहती है. सामान्यतः  इस layer की  resistivity  2000 ओम मीटर रहती है जबकि मिट्टी का resistivity 100  ओम मीटर रहती  है. इस प्रकार यह एक high रेसिस्टिव path  देता है जिसकी वजह से आउटडोर स्विचयार्ड में काम करने वाले कर्मचारी को कोई भी हानि नहीं पहुंचती. तथा यदि किसी कारण से यदि सबस्टेशन में करंट आ गयी है तो, कंकड़ी से ना बहकर low resistive  path से  earth हो जाती है.  आउटडोर स्विच यार्ड में कंकड़ी बिछाने के कुछ और भी फायदे हैं जो इस प्रकार हैं-
1.यह एक high resistive layer प्रदान करता है. जो स्विचयार्ड में काम कर रहे कर्मचारी की सुरक्षा हेतु आवश्यक है.
2.इसकी सरफेस पर  रेंगने वाले साँप आदि  जानवर सामान्यता ट्रांसफार्मर या अन्य इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट पर आसानी से नहीं पहुंच सकते. इस प्रकार यह fault की सम्भावना को कम करता है.
3. कंकड़ी की लेयर होने के कारण साधारणतः घास एवं अन्य खरपतवार भी नहीं उगते. स्विचयार्ड में सफाई बनी रहती है .
4. कंकड़ी की मोटी परत सबस्टेशन की नमी बरकरार रखती है,  क्योंकि मिट्टी की नमी खरपतवार द्वारा वाष्पित नहीं होने पाती है. अर्थिंग के अच्छी तरह से काम करने के लिए सब स्टेशन में नमी का होना बेहद आवश्यक है.
5. ट्रांसफार्मर/C.T./P.T.अथवा ऑयल सर्किट ब्रेकर से गिरने वाले तेल कहीं पर इकट्ठा नहीं होते अतः आग लगने का भय नहीं रहता है.
6.सब स्टेशन पर बड़ी-बड़ी कंकड़ी बिछी  होने के कारण कोई भी इस पर बहुत तेजी से नहीं चल/दौड़ सकता है इस प्रकार भी यह किसी के सब स्टेशन स्विच यार्ड में टकराने के खतरे को कम करता है.

प्रश्न 2-सबस्टेशन की fencing/चहारदीवारी क्यों आवश्यक है?
उत्तर -
आउटडोर सबस्टेशन के अंदर कोई अनधिकृत व्यक्ति अथवा पशु ना आने पाए, इसलिए इसकी fencing अत्यन्त आवश्यक है.  Fencing की ऊंचाई 1.8 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए. सुरक्षा की दृष्टि से fencing को कम से कम 2 जगह से अर्थिंग से जुड़ा होना चाहिए.

प्रश्न 3-सबस्टेशन पर कौन कौन से safety items होने चाहिए?
उत्तर -

1.Fire  extinguisher
2.Fire bucket with sand
3.Earth Discharge rod
4.हेलमेट
5.Shock treatment  chart
6.Torch
7.टूल बॉक्स जिसमें सभी आवश्यक टूल्स हों.
8.फर्स्ट ऐड बॉक्स जिसमें सभी आवश्यक  दवाइयां हों.
9.HT/LT  panel  बोर्ड के पास रबर mat होनी chahiye.
10.हैंड gloves
11.डेंजर बोर्ड,  "Men At  Work" का बोर्ड होना चाहिए.
12. काम करते समय मोटे रबर sole वाले जूते ही  पहनें.

प्रश्न 4-सबस्टेशन पर क्या क्या चीजें earth होनी चाहिए?
उत्तर -
सबस्टेशन पर निम्नलिखित की अर्थिंग करना अति आवश्यक है -
1.ट्रांसफार्मर का न्युट्रल- ट्रांसफार्मर  के न्युट्रल की कम से कम 2 अर्थिंग आवश्यक है.
2.ट्रांसफार्मर बॉडी -ट्रांसफार्मर बॉडी में भी 2 अर्थिंग आवश्यक  है.
3.HT line के supporting structure को  कम से कम 2 जगह से
4. सबस्टेशन की fencing को कम से कम 2 जगह से.
5. सबस्टेशन में स्थित LT panel तथा स्विच के हैंडल के पास भी अर्थिंग होना चाहिए.

प्रश्न 5-पावर फैक्टर क्या है?  आदर्श स्थिति में यह कितना होना चाहिए?  क्या पावर फैक्टर का मान 1 से अधिक हो सकता है?
इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है?क्या होगा यदि आपके घर का पावर फैक्टर बहुत कम आ रहा है?



Top 5 Most asked Electrical Questions in hindi

Top 5 most asked Electrical Questions

प्रश्न 1- ट्रांसफार्मर का क्या काम होता है?
उत्तर - यह सप्लाई  वोल्टेज/इनकमिंग वोल्टेज  को आवश्यकता  अनुसार output वोल्टेज पर  कम  या ज्यादा करता है. ट्रांसफार्मर  के 2 प्रकार होते हैं.
 i. Step Up    ट्रांसफार्मर - यह इनकमिंग  में आने वाली  सप्लाई  वोल्टेज  को बढाकर आउटपुट  में ज्यादा वोल्टेज की सप्लाई  देता है.  पावर जनरेशन  सब स्टेशन /जहाँ  से विद्युत  उत्पादन  होता है,  पर step up ट्रांसफार्मर लगा होता है.
ii. Step Down  ट्रांसफार्मर -यह ट्रांसफार्मर  ज्यादा वोल्टेज  की सप्लाई  को कम वोल्टेज  में बदलकर आउटपुट  में देता है. डिस्ट्रीब्यूशन में  इसी ट्रांसफार्मर  का प्रयोग होता है.
हम अपने दैनिक  जीवन में भी इसी ट्रांसफार्मर  को देखते हैं. प्रायः 11 Kilo Volt  की सप्लाई  को 440 Volt में बदलने वाले step down ट्रांसफार्मर  हम अपने आस पास सब स्टेशन पर देखते हैं.

प्रश्न 2-किस यन्त्र की सहायता से इंसुलैशन की value check  की जाती है?
उत्तर - इंसुलेशन टेस्टिंग के प्रयोग में आने  वाले उपकरण को megger अथवा इंसुलेशन टेस्टर नाम से जानते हैं. इसे इंसुलेशन resistance के रूप में व्यक्त करते हैं.  इसकी यूनिट mega ohm है.

प्रश्न 3- Earth  resistance क्या है?  घरों  में होने वाली वायरिंग के लिए earth resistance कितना permissible/allowed है?
उत्तर -विद्युत से खतरे को कम करने के लिए सुरक्षा कारणों से घरों में अर्थिंग होना अत्यन्त  आवश्यक  है. इसे earth resistance के रूप में व्यक्त  करते हैं,  इसका मात्रक ओम  है. आदर्श  earth resistance शून्य  होना चाहिए.  घरों में earth resitance कभी भी 10 ओम से अधिक नहीं होना  चाहिए. 

प्रश्न -4- ओम का क्या नियम है?
उत्तर -ओम के नियम के अनुसार यदि किसी चालक/ conductor की भौतिक अवस्थायें जैसे ताप , दाब,आयतन , लम्बाई एवं क्षेत्रफल आदि ना  बदले तो चालक  सिरों पर आरोपित विभवांतर तथा इसमें बहने वाली विद्युत धारा का अनुपात नियत/constant रहता है।
 अतः V α I
V=IR, जहाँ  पर  R एक समानुपाती नियतांक/Constant  है. इसे ही चालक का प्रतिरोध/ Resistence कहते  हैं। प्रतिरोध /resistence  का S.I. मात्रक ओम(Ohm )है. जिसे Ω  से दर्शाते हैं।

 प्रश्न -5 -ट्रांसफार्मर में मुख्यतः कौन कौन से losses  होते हैं?
उत्तर -Transformer में मुख्यतः २ प्रकार के losses होते हैं -
i . Core loss.- यह भी २ प्रकार का होता है।
a . Hysteresis Loss -यह loss ट्रांसफॉर्मर के Core में होता है। इस loss को काम करने के लिए ट्रांसफार्मर कोर ऐसे material   की चुनते हैं जिसमें BH loop बहुत छोटा होता हो अर्थात मटेरियल की permeability  अच्छी होनी   चाहिए।  Transformer की Core,CRGO(Cold Rolled Grain Oriented)steel  की बनी  होती है।
b. Eddy Current Loss - ट्रांसफार्मर में AC  धारा/current   प्रवाहित होने पर ट्रांसफार्मर core  में भी  Circulating current बहने लगती है जो कि पानी में उत्पन्न भँवर की भांति प्रतीत होती हैं।  यह भँवर धारायें ट्रांसफार्मर core   को गरम कर  देती हैं। Eddy Current Loss को कम   करने   के लिए  Laminated core का प्रयोग किया जाता है। क्यूंकि यह दोनों ही loss  ट्रांसफार्मर की core  में हैं।  इसीलिए इन्हें Iron Loss भी कहते  हैं।
ii .Copper Loss -यह loss ट्रांसफार्मर की winding  में होता है।  क्योंकि यह loss  ट्रांसफार्मर की   copper  winding में होता है।  अतः इसे Copper  Loss  कहते हैं।

Tuesday, 15 October 2019

Teacher aur Student ki Inspiration story

अद्भुत संदेश है इस कहानी में
                      

एक बार एक व्यक्ति की उसके बचपन के टीचर से मुलाकात होती है । वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है।

वे बड़े प्यार से पूछती है, 'अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो ?'

' मैं भी एक टीचर बन गया हूं ' वह व्यक्ति बोला,' और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे ही मिली थी जब में 7 वर्ष का था।'

उस टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ, और वे बोली कि,' मुझे तो आपकी शक्ल भी याद नही आ रही है, उस उम्र में मुझसे कैसी प्रेरणा मिली थी ??'

वो व्यक्ति कहने लगा कि ....

'यदि आपको याद हो, जब में चौथी क्लास में पढ़ता था, तब एक दिन सुबह सुबह मेरे सहपाठी ने उस दिन उसकी महंगी घड़ी  चोरी होने की आपसे शिकायत की थी। 
आपने क्लास का दरवाज़ा बन्द करवाया और सभी बच्चो को क्लास में पीछे एक साथ लाइन में खड़ा होने को कहा था। फिर आपने सभी बच्चों की जेबें टटोली थी। मेरे जेब से आपको घड़ी मिल गई थी जो मैंने चुराई थी। पर चूंकि आपने सभी बच्चों को अपनी आंखें बंद रखने को कहा था तो किसी को पता नहीं चला कि घड़ी मैंने चुराई थी।
टीचर उस दिन आपने मुझे लज्जा व शर्म से बचा लिया था। और इस घटना के बाद कभी भी आपने अपने व्यवहार से मुझे यह नही लगने दिया कि मैंने एक गलत कार्य किया था। 
आपने बगैर कुछ कहे मुझे क्षमा भी कर दिया और दूसरे बच्चे मुझे चोर कहते इससे भी बचा लिया था।'
ये सुनकर टीचर बोली, ' मुझे भी नही पता था बेटा कि वो घड़ी किसने चुराई थी।'

वो व्यक्ति बोला,'नहीं टीचर, ये कैसे संभव है ? आपने स्वयं अपने हाथों से चोरी की गई घड़ी मेरे जेब से निकाली थी।'

टीचर बोली.....
'बेटा मैं जब सबके पॉकेट चेक कर रही थी, उस समय मैने कहा था कि सब अपनी आँखें बंद रखेंगे , और वही मैंने भी किया, मैंने स्वयं भी अपनी आंखें बंद रखी थी।'

मित्रों।।

किसी को उसकी ऐसी शर्मनाक परिस्थिति से बचाने का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है?

आइए प्रण करें कि यदि हमें किसी की कमजोरी  मालूम पड़ भी जाए तो उसका दोहन करना तो दूर, उस व्यक्ति को ये आभास भी ना होने देना चाहिए कि आपको इसकीं जानकारी भी हैं।

- साभार व्हाट्सअप